झारखंड हाई कोर्ट का बड़ा फैसला राज्य की अनुमति के बिना कर्मचारियों का वेतन तय कर सकेगा बिहार राज्य वित्त निगम
झारखंड उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि बिहार राज्य वित्त निगम राज्य सरकार की पूर्व अनुमति के बिना अपने कर्मचारियों का वेतन और सेवा शर्तें निर्धारित करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है। न्यायमूर्ति एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने ‘राज्य वित्त निगम अधिनियम, १९५१’ की धारा २३ का हवाला देते हुए कहा कि निगम के पास अपने अधिकारियों और कर्मचारियों का पारिश्रमिक तय करने की पूर्ण शक्ति है। अदालत ने माना कि राज्य सरकार की निर्देश देने की शक्ति (धारा ३९) निगम के आंतरिक प्रशासनिक और वित्तीय निर्णयों, जैसे वेतन निर्धारण, में हस्तक्षेप नहीं कर सकती।
यह निर्णय २०१० में स्वीकृत छठे वेतन आयोग के लाभों को लागू करने से जुड़े विवाद के बाद आया है। निगम ने पहले इसे लागू करने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन बाद में वित्तीय घाटे का तर्क देकर इसे वापस ले लिया था। उच्च न्यायालय ने पाया कि जिस समय यह प्रस्ताव पारित हुआ था, उस समय निगम १८.५८ करोड़ रुपये के लाभ में था, और बाद के वर्षों के घाटे को आधार बनाकर कर्मचारियों के वैध अधिकारों को नहीं रोका जा सकता। इस फैसले से निगम के कर्मचारियों को लंबे समय से लंबित वेतन लाभ मिलने का रास्ता साफ हो गया है।

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