राज्यसभा चुनाव झारखंड में कांग्रेस और झामुमो द्वारा अनदेखी से राजद और भाकपा नाराज
झारखंड में आगामी राज्यसभा चुनावों को लेकर विपक्षी इंडिया गठबंधन के भीतर मतभेद उभरकर सामने आए हैं। गठबंधन का हिस्सा होने के बावजूद, राष्ट्रीय जनता दल और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन ने आरोप लगाया है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस ने चुनाव को लेकर उनसे कोई संपर्क या विचार-विमर्श नहीं किया है। दोनों दलों ने इस कथित उपेक्षा और संवाद की कमी पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। यह विवाद तब और गहरा गया जब कांग्रेस ने गठबंधन सहयोगियों, विशेष रूप से झामुमो, राजद और भाकपा (माले) के विधायकों के समर्थन के भरोसे प्रणव झा को झारखंड से अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया।
राजद और भाकपा (माले) के नेताओं का मानना है कि गठबंधन के बड़े दलों को कोई भी बड़ा राजनीतिक निर्णय लेने से पहले सभी सहयोगियों को विश्वास में लेना चाहिए था। इस तरह की एकतरफा घोषणाओं से गठबंधन की एकजुटता पर असर पड़ता है। हालांकि, कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा की जीत पूरी तरह से झारखंड मुक्ति मोर्चा, राष्ट्रीय जनता दल और भाकपा (माले) के विधायकों के सामूहिक समर्थन पर ही निर्भर करेगी। इस अंदरूनी खींचतान के बीच अब यह देखना दिलचस्प होगा कि दोनों नाराज दल इस चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन किस प्रकार करते हैं और क्या आगामी दिनों में जेएमएम-कांग्रेस नेतृत्व उनकी शिकायतों को दूर करने के लिए कोई कदम उठाता है।

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