झारखंड में DGP नियुक्ति नियम पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड में डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस (DGP) की नियुक्ति से जुड़े नियमों की वैधता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को हुई सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा बनाए गए नियम, पहली नज़र में, 2006 के अहम प्रकाश सिंह मामले में जारी निर्देशों के खिलाफ लगते हैं। कोर्ट ने खास तौर पर उस नियम पर आपत्ति जताई जिसके तहत किसी सीनियर पुलिस अधिकारी को DGP पद के लिए तब भी विचार में लिया जा सकता है, जब उनकी रिटायरमेंट में छह महीने से भी कम समय बचा हो। झारखंड की मौजूदा DGP तदाशा मिश्रा को नोटिस जारी करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को जवाब देने के लिए एक हफ़्ते का समय दिया। कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि या तो वे संबंधित नियम पर फिर से विचार करें या फिर कोर्ट में अपना जवाब दाखिल करें। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन जजों की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। केंद्र सरकार ने कोर्ट में झारखंड सरकार द्वारा बनाए गए DGP नियुक्ति नियमों की वैधता को चुनौती दी है। केंद्र का तर्क है कि पुलिस प्रमुख की नियुक्ति के लिए राज्य सरकार द्वारा बनाया गया तरीका सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले तय की गई गाइडलाइंस के अनुरूप नहीं है। सुनवाई के दौरान, बेंच ने साफ़ किया कि राज्य सरकार का कोई भी ऐसा नियम जो सुप्रीम कोर्ट के अनिवार्य निर्देशों का उल्लंघन करता हो, उसे बरकरार नहीं रखा जा सकता। कोर्ट ने कहा कि पुलिस प्रमुख की नियुक्ति और कार्यकाल से जुड़े नियमों का मकसद एक निष्पक्ष और पारदर्शी चयन प्रक्रिया सुनिश्चित करना है।

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