सेबी की नई पहल: अनलिस्टेड शेयर बाजार को विनियमित करने पर विचार
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) भारत के अनलिस्टेड शेयर बाजार को विनियमित करने के लिए एक महत्वपूर्ण योजना पर काम कर रहा है। सेबी के चेयरपर्सन तुहिन कांत पांडे ने मुंबई में आयोजित एक सम्मेलन के दौरान बताया कि नियामक इस बात की जांच कर रहा है कि क्या उसके पास उन कंपनियों को नियंत्रित करने का कानूनी अधिकार है जो वर्तमान में स्टॉक एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध नहीं हैं। वर्तमान में, निवेशक अनलिस्टेड शेयर मुख्य रूप से प्राइवेट डील या बिचौलियों के माध्यम से खरीदते हैं, जहाँ इन कंपनियों को सख्त प्रकटीकरण नियमों का पालन नहीं करना पड़ता है। इस मुद्दे पर पारदर्शिता लाने के लिए सेबी कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के साथ मिलकर चर्चा कर रहा है।
नियामक की मुख्य चिंता अनलिस्टेड मार्केट में तय की गई कीमतों और भविष्य में आने वाले आईपीओ के दौरान सामने आने वाले मूल्यांकनों के बीच का बड़ा अंतर है। अक्सर निजी सौदों में तय कीमतें आईपीओ की बुक-बिल्डिंग प्रक्रिया से मेल नहीं खातीं, जिससे निवेशकों के लिए भ्रम और जोखिम की स्थिति पैदा होती है। चेयरपर्सन ने स्पष्ट किया कि यद्यपि लिस्टेड कंपनियों के नियम सीधे तौर पर अनलिस्टेड कंपनियों पर लागू नहीं किए जा सकते, लेकिन निवेशकों को कंपनी की वित्तीय स्थिति और जोखिमों की सही जानकारी समय पर मिले, इसके लिए नए प्रावधानों की आवश्यकता है। इसके अलावा, सेबी वर्तमान में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के प्रस्तावित आईपीओ के निपटान आवेदन की भी समीक्षा कर रहा है।

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