केरल समाजम में धूमधाम से मना ओणम, पुक्कलम व पुलिकली ने बांधा समां
केरल का प्रमुख पर्व ओणम रविवार को केरल समाजम, जमशेदपुर परिसर में हर्षोल्लास और पारंपरिक रंगों के साथ मनाया गया। इस वर्ष ओणम 26 अगस्त को मनाया गया था, लेकिन अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए केरल समाजम की ओर से सामुदायिक समारोह रविवार को आयोजित किया गया।
समारोह की शुरुआत भव्य पुक्कलम (फूलों की रंगोली) से हुई। समिति के सदस्यों ने आकर्षक फूलों से पुक्कलम तैयार किया। इसके बाद सदस्यों के लिए पुक्कलमात्सरम यानी फूलों की रंगोली प्रतियोगिता आयोजित की गई।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बच्चों की पारंपरिक नृत्य प्रस्तुतियों, ओणम गीतों और विभिन्न रंगारंग कार्यक्रमों ने दर्शकों का मन मोह लिया। समारोह का प्रमुख आकर्षण पुलिकली (टाइगर डांस) रहा, जिसमें कलाकारों ने अपनी जीवंत प्रस्तुति से माहौल को उत्सवमय बना दिया। वहीं, राजा महाबली के प्रतीकात्मक स्वागत ने ओणम की पौराणिक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर दिया।
समारोह के अंत में भव्य ओणसाध्या का आयोजन हुआ। केले के पत्ते पर परोसे गए पारंपरिक व्यंजनों से लोगों ने केरल के समृद्ध खान-पान का स्वाद लिया। ओणसाध्या में चावल, विभिन्न प्रकार के व्यंजन, अचार, पापड़ और पारंपरिक मिठाई पायसम विशेष आकर्षण रहे।
कार्यक्रम में केरल समाजम के अध्यक्ष के. मुरलीधरन, महासचिव सुनील कुमार, चेयरमैन टी.के. सुकुमारन, ट्रस्टी टी.ए. राधाकृष्णन एवं पी. ससीधरन, उपाध्यक्ष विनु कुमार, सहायक सचिव पी.के. शंभूजन एवं टी.टी. राजू, सहायक कोषाध्यक्ष विनोद मेनन सहित कार्यकारिणी समिति के अन्य सदस्य मौजूद रहे।
केरल समाजम ने समारोह को सफल बनाने के लिए 1000 से अधिक सदस्यों, उनके परिवारों और शुभचिंतकों के प्रति आभार जताया।
महाबली की कथा से जुड़ा है ओणम
ओणम के केंद्र में केरल के प्रिय राजा महाबली की कथा है। मान्यता के अनुसार महाबली अपनी प्रजा के प्रति न्यायप्रिय और उदार शासक थे। भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर उनसे तीन पग भूमि मांगी। महाबली के वचन देने के बाद वामन ने विराट रूप धारण कर तीन पगों में समस्त लोकों को नाप लिया। महाबली को पाताल लोक जाना पड़ा, लेकिन भगवान विष्णु ने उन्हें वर्ष में एक बार अपनी प्रजा से मिलने की अनुमति दी। इसी मान्यता के तहत ओणम मनाया जाता है।
ओणम को अच्छी फसल और समृद्धि का पर्व भी माना जाता है। मलयालम पंचांग के चिंगम महीने में दस दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में घर-आंगन में फूलों से पुक्कलम सजाने, पारंपरिक नृत्य-संगीत, खेल और सामूहिक भोज की परंपरा है। ओणसाध्या इस पर्व का विशेष हिस्सा है।

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