झारखंड ने जी-रैम को नकारा मनरेगा के स्वरूप को बनाए रखने पर जोर
झारखंड सरकार ने केंद्र सरकार के प्रस्तावित ‘जी-रैम’ मॉडल को राज्य में लागू करने से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया है। राज्य सरकार का तर्क है कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम का वर्तमान ढांचा ग्रामीण गरीबों को रोजगार की गारंटी देने में सक्षम है, और इसमें किसी भी प्रकार का बड़ा बदलाव इसके मूल उद्देश्य को प्रभावित कर सकता है। मुख्यमंत्री और संबंधित विभाग ने केंद्र को सूचित किया है कि वे मनरेगा के विकेंद्रीकृत स्वरूप को सुरक्षित रखना चाहते हैं ताकि स्थानीय पंचायतों के पास निर्णय लेने की शक्ति बनी रहे।
झारखंड सरकार के अनुसार, ‘जी-रैम’ जैसे नए मॉडल से प्रशासनिक जटिलताएं बढ़ सकती हैं और फंड के प्रवाह में देरी हो सकती है, जिसका सीधा असर राज्य के उन लाखों मजदूरों पर पड़ेगा जो अपनी आजीविका के लिए इस योजना पर निर्भर हैं। सरकार ने मांग की है कि नया मॉडल थोपने के बजाय मौजूदा मनरेगा प्रणाली में सुधार किया जाए और समय पर मजदूरी भुगतान सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी बाधाओं को दूर किया जाए। यह निर्णय झारखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थिरता देने और सामाजिक सुरक्षा जाल को मजबूत रखने की राज्य सरकार की प्राथमिकता को दर्शाता है।

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