आईआईटी-आईएसएम धनबाद के छात्रों द्वारा विकसित इस नवीन तकनीक का हिंदी सारांश यहाँ दिया गया है
आईआईटी-आईएसएम धनबाद के केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के द्वितीय वर्ष के छात्रों ने एक अभूतपूर्व तकनीक विकसित की है, जो कोयला खदानों से निकलने वाली हानिकारक ‘कोल बेड मीथेन’ गैस को पर्यावरण के अनुकूल ईंधन में बदल देती है। ‘हाइड्रोजन एनरिच्ड कोल बेड मीथेन’ नामक इस ईंधन को सीधे सीएनजी कारों में बिना किसी बदलाव के उपयोग किया जा सकता है। सहायक प्रोफेसर एजाज अहमद के मार्गदर्शन में छात्र कैलाश कृष्ण, नितिन गौर और देवाशीष दास ने इस तकनीक का प्रदर्शन करने के लिए एक कार भी तैयार की है, जो भविष्य में ‘ग्रीन माइनिंग’ और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, कोल बेड मीथेन एक शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैस है जो कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में पर्यावरण के लिए लगभग २५ गुना अधिक हानिकारक है। इस प्रक्रिया में मीथेन के एक हिस्से को ‘क्रैक’ करके हाइड्रोजन और कार्बन नैनोट्यूब प्राप्त किए जाते हैं, जिससे ईंधन की दक्षता बढ़ती है और प्रदूषण कम होता है। चूंकि इस प्रक्रिया में कार्बन नैनोट्यूब जैसे मूल्यवान उप-उत्पाद भी बनते हैं, इसलिए उत्पादित हाइड्रोजन की लागत लगभग शून्य हो जाती है, जो इसे व्यावसायिक रूप से भी एक किफायती विकल्प बनाती है।

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