झारखंड के दुमका जिले में अवैध व्यापार से बचाई गई मादा भालू, तस्करों की प्रताड़ना के बाद इलाज के लिए भेजी गई रेस्क्यू सेंटर
झारखंड के दुमका जिले में वन विभाग और वन्यजीव संरक्षण संस्थाओं ने एक गुप्त सूचना के आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए एक युवा मादा स्लॉथ भालू (रीछ) को ‘डांसिंग बियर’ (भालू का नाच) के अवैध और क्रूर व्यापार से सफलतापूर्वक बचा लिया है। झारखंड-पश्चिम बंगाल सीमा के पास तस्कर इस बेजुबान जानवर को सड़क पर करतब दिखाने और अवैध कमाई करने के उद्देश्य से ले जा रहे थे, लेकिन वन अधिकारियों को आते देख वे भालू को वहीं छोड़कर फरार हो गए। इस लुप्तप्राय वन्यजीव को बचाने के बाद उसे तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई, क्योंकि वह गंभीर रूप से डरी हुई और प्रताड़ित थी। भारत में वर्ष दो हजार नौ से ही भालू के नाच और इसके व्यापार पर पूरी तरह से कानूनी प्रतिबंध लगा हुआ है, लेकिन सीमाओं के पास इस तरह की घटनाएं अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
रेस्क्यू सेंटर के पशु चिकित्सकों ने प्राथमिक जांच के दौरान बताया कि तस्करों ने भालू को अपने नियंत्रण में रखने के लिए उसके संवेदनशील थूथन (नाक के ऊपरी हिस्से) को नुकीली चीज से छेद दिया था और उसके दांतों को भी बेरहमी से तोड़ दिया था, ताकि वह किसी पर हमला न कर सके। इसके अतिरिक्त, लंबे समय तक भूखा रखने के कारण वह गंभीर कुपोषण और निर्जलीकरण (डीहाइड्रेशन) का शिकार हो चुकी थी, जिससे वह शारीरिक रूप से बेहद कमजोर हो गई थी। दुमका के जंगलों से बचाई गई इस पीड़ित मादा भालू को अब पूर्ण चिकित्सा उपचार, उचित खान-पान और दीर्घकालिक पुनर्वास के लिए वन्यजीव संरक्षण केंद्र (वाइल्डलाइफ रेस्क्यू सेंटर) भेज दिया गया है, जहाँ विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में उसकी हालत में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है।

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