असम में चुनाव प्रचार से रोके जाने पर भड़के हेमंत सोरेन प्रधानमंत्री के दौरे के बीच लगाया बाधा डालने का आरोप
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने असम विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्हें और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन को जानबूझकर जनसभाएं करने से रोका जा रहा है। ६ अप्रैल २०२६ को साझा की गई जानकारी के अनुसार, सोरेन ने दावा किया कि असम में प्रधानमंत्री के कार्यक्रम का हवाला देकर उनके हेलीकॉप्टर को उड़ान भरने की अनुमति नहीं दी गई। इस कारण उन्हें रंगनदी और चबुआ विधानसभा क्षेत्रों में अपनी निर्धारित रैलियों को रद्द करना पड़ा और अंतत: उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा के उम्मीदवार के समर्थन में वर्चुअली वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधन किया। उन्होंने इसे “लोकतंत्र की आवाज दबाने का प्रयास” करार दिया।
हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए कहा कि संवैधानिक संस्थाओं के जरिए विपक्ष को रोकना विरोधियों की हताशा को दर्शाता है। अपने संबोधन में उन्होंने असम के चाय बागान श्रमिकों और आदिवासी समुदायों के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया, जिसमें दैनिक न्यूनतम मजदूरी ₹५०० करने की मांग शामिल थी। उन्होंने असम के चाय जनजातियों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा न दिए जाने को “राष्ट्रीय अन्याय” बताया। गौरतलब है कि जेएमएम ने असम की १८ सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं, और सोरेन का यह कड़ा रुख राज्य में अपनी पार्टी के विस्तार और आदिवासी वोटों को एकजुट करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

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