झारखंड उच्च न्यायालय ने सामाजिक बहिष्कार के बीच पहाड़िया जनजाति को सुरक्षा देने का आदेश दिया
झारखंड उच्च न्यायालय ने साहिबगंज जिले में पहाड़िया समुदाय के खिलाफ हो रहे सामाजिक और आर्थिक बहिष्कार पर कड़ा रुख अपनाते हुए पुलिस और जिला प्रशासन को उन्हें तत्काल सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया है। अदालत ने विशेष रूप से साहिबगंज के कसबा और सिरासिन गांवों की स्थिति पर चिंता व्यक्त की, जहाँ इस आदिम जनजाति को राशन, चिकित्सा उपचार और सरकारी पानी के नलों जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित किया जा रहा था। न्यायमूर्ति ने इसे ‘समानांतर प्रशासन’ चलाने की कोशिश करार दिया और कहा कि किसी भी समूह को राज्य की शक्तियों को अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि पहाड़िया समुदाय के मौलिक अधिकारों और संवैधानिक गारंटियों का उल्लंघन किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मामले की सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि इन गांवों में बाहरी लोगों के कथित प्रवेश के कारण मूल पहाड़िया निवासी अपने ही जिले में अल्पसंख्यक बन गए हैं और उन्हें डराया-धमकाया जा रहा है। उच्च न्यायालय ने पुलिस को यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया है कि समुदाय के लोग बिना किसी डर के अपने त्योहार मना सकें और उन्हें भोजन, पानी एवं शिक्षा जैसी सभी आवश्यक सेवाएं निर्बाध रूप से प्राप्त हों।

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