बोकारो लापता लड़की मामला झारखंड हाईकोर्ट ने कंकाल की पहचान पर उठाए सवाल शीर्ष अधिकारियों को किया तलब
झारखंड हाईकोर्ट ने बोकारो में १८ वर्षीय पुष्पा महतो के लापता होने के मामले में बरामद कंकाल की पहचान को लेकर गंभीर संदेह व्यक्त किया है। न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार से कड़े सवाल पूछे कि बिना डीएनए जांच और फोरेंसिक सत्यापन के पुलिस इस नतीजे पर कैसे पहुँची कि बरामद कंकाल लापता लड़की का ही है। अदालत ने इस बात पर भी नाराज़गी जताई कि कंकाल मिलने के कई दिन बीत जाने के बाद भी माता-पिता के डीएनए नमूने क्यों नहीं लिए गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने चेतावनी दी कि यदि जांच में लापरवाही पाई गई, तो केस सीबीआई को सौंपा जा सकता है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य की डीजीपी तदाशा मिश्रा, बोकारो एसपी और एफएसएल निदेशक सहित विशेष जांच दल को गुरुवार सुबह १०:३० बजे व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है। उल्लेखनीय है कि जुलाई २०२५ से लापता लड़की का सुराग लगाने में पुलिस लगभग नौ महीने तक नाकाम रही थी, लेकिन कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अचानक एक ही दिन में मामला सुलझाने और कंकाल बरामद करने का दावा किया गया। याचिकाकर्ता रेखा देवी की ओर से पेश वकीलों ने भी तस्वीरों के आधार पर कंकाल के उनकी बेटी का होने पर आशंका जताई है। अब वरिष्ठ अधिकारियों को अदालत में पेश होकर जांच की खामियों और फोरेंसिक प्रक्रियाओं पर स्पष्टीकरण देना होगा।

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