सिमडेगा में खुला झारखंड का अनूठा संग्रहालय आदिवासी विरासत और औपनिवेशिक इतिहास का संगम
झारखंड के सिमडेगा जिले में एक ऐतिहासिक औपनिवेशिक प्रशासनिक भवन को ‘सिमडेगा हेरिटेज सेंटर सह संग्रहालय’ में बदल दिया गया है, जिसका उद्घाटन ७ मार्च २०२६ को हुआ। यह संग्रहालय क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करने के लिए बनाया गया है, जहाँ १९४७ में पहली बार तिरंगा फहराया गया था। यहाँ एक ओर ब्रिटिश काल के अदालती कक्ष, बंदूकें, कारतूस और आधिकारिक दस्तावेज प्रदर्शित हैं, तो दूसरी ओर आदिवासी जीवन से जुड़े पारंपरिक बांस के उपकरण, मछली पकड़ने के जाल, तेल निकालने के यंत्र और शिकार के औजार रखे गए हैं। यह स्थान न केवल इतिहास को सहेजता है, बल्कि पुरानी और नई पीढ़ी के बीच सांस्कृतिक ज्ञान के आदान-प्रदान का माध्यम भी बन गया है।
इस संग्रहालय की सबसे बड़ी विशेषता इसका ‘सामुदायिक मॉडल’ है, जिसका संचालन स्थानीय स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा किया जा रहा है। यह पहल न केवल संस्कृति का संरक्षण करती है बल्कि स्थानीय महिलाओं के लिए आजीविका का स्रोत भी बनी है। संग्रहालय के अभिलेखागार १९१७ के उन दर्दनाक इतिहास को भी उजागर करते हैं, जब ब्रिटिश काल के दौरान प्रथम विश्व युद्ध के लिए यहाँ से आदिवासी मजदूरों की भर्ती की गई थी। मुंडारी गीतों और मौखिक परंपराओं के माध्यम से उन मजदूरों के अनुभवों को प्रदर्शित कर, यह संग्रहालय सरकारी दस्तावेजों और लोक स्मृतियों के बीच के अंतर को पाटता है, जिससे इतिहास जीवंत और साझा अनुभव बन जाता है।

टाटाकर्मी की गैरहाजिरी का फायदा उठाकार चोरों ने उड़ाए 50 लाख के जेवर, क्वार्टर में बड़ी चोरी
302.13 करोड़ रुपये से चमकेगी झारखंड की मिड-डे-मिल योजना, सबसे ज्यादा बजट पाने वाले जिले आए सामने
फंदे से झूलता मिला छात्रा का शव, जांच में जुटी पुलिस
ED ने झारखंड राज्य सहकारी बैंक ‘धोखाधड़ी’ मामले में 7 जगहों पर छापेमारी की
झारखंड में चार दिनों के लिए बारिश का अलर्ट
झारखंड में बदलेगा मौसम का मिजाज: तीन दिनों तक झमाझम बारिश के आसार, सभी जिलों में वज्रपात का अलर्ट