झारखंड में 6 महीनों में मलेरिया के 16,700 से ज़्यादा मामले सामने आए
झारखंड में मलेरिया अब भी सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है। राज्य के स्वास्थ्य विभाग के गुरुवार को जारी एक बयान के अनुसार, इस साल जनवरी से जून के बीच पूरे राज्य में मलेरिया के 16,728 मामले सामने आए।
बयान के मुताबिक, इनमें से लगभग 76 प्रतिशत मामले पूर्वी सिंहभूम और पश्चिमी सिंहभूम जिलों में दर्ज किए गए, जिससे ये जिले राज्य के सबसे ज़्यादा प्रभावित क्षेत्र बन गए हैं।
वहीं, अकेले जून महीने में डेंगू के 77 मामले सामने आए, जिनमें से सबसे ज़्यादा 27 मामले रांची में दर्ज किए गए।
ये आंकड़े गुरुवार को रांची के नेपाल हाउस में आयोजित वेक्टर-जनित बीमारियों की रोकथाम और नियंत्रण पर राज्य-स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक के दौरान साझा किए गए। इस बैठक की अध्यक्षता स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा और परिवार कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने की।
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि जून 2026 तक पूर्वी सिंहभूम में मलेरिया के 6,527 और पश्चिमी सिंहभूम में 6,172 मामले सामने आए। इन दोनों जिलों में मिलाकर राज्य के कुल मलेरिया मामलों का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा दर्ज किया गया।
मामलों की अधिक संख्या को देखते हुए, अधिकारियों को निगरानी बढ़ाने, समय पर जांच और पूरा इलाज सुनिश्चित करने, दवाओं की पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने, मच्छर नियंत्रण के उपायों को मज़बूत करने और जन-जागरूकता अभियानों में तेज़ी लाने के निर्देश दिए गए।
अतिरिक्त मुख्य सचिव ने ज़ोर दिया कि मलेरिया, लिम्फैटिक फाइलेरियासिस, डेंगू, चिकनगुनिया, काला-अज़ार और जापानी एन्सेफलाइटिस जैसी वेक्टर-जनित बीमारियों से निपटना केवल स्वास्थ्य विभाग की ज़िम्मेदारी नहीं हो सकती।
उन्होंने कहा कि बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण के लिए ग्रामीण विकास, पंचायती राज, शहरी विकास, शिक्षा, श्रम और पेयजल एवं स्वच्छता जैसे विभागों के समन्वित प्रयासों की आवश्यकता है।
उन्होंने बीमारी की रोकथाम को एक जन-आंदोलन का रूप देने का भी आह्वान किया और अधिकारियों को ज़िला स्तर से लेकर पंचायत स्तर तक ज़िम्मेदारियां स्पष्ट रूप से तय करने का निर्देश दिया।

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