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झारखंड हाई कोर्ट ने एक सेवानिवृत्त कर्मचारी के पेंशन और अन्य बकाया राशि का भुगतान न करने पर कड़ा रुख अपनाते हुए जिला परिवहन अधिकारी पलामू के वेतन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति आनंद सेन की पीठ ने एक अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया, जिसमें २०११ में सेवानिवृत्त हुए एक लिपिक को १५ वर्षों के बाद भी उसके वैध लाभ नहीं मिले थे। अदालत ने स्पष्ट किया कि विभाग द्वारा ‘सर्विस बुक’ न मिलने का बहाना बनाकर भुगतान रोकना पूरी तरह से अनुचित है और इसे कर्मचारी के मौलिक अधिकारों का हनन माना जाएगा।
अदालत ने राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को चेतावनी दी है कि यदि अगले छह सप्ताह के भीतर आदेश का पूरी तरह पालन नहीं किया गया, तो हज़ारीबाग के उपायुक्त के वेतन पर भी रोक लगाई जा सकती है। इससे पहले भी कोर्ट ने भुगतान के लिए कई बार समय दिया था, लेकिन बार-बार आश्वासन के बावजूद बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया। हाई कोर्ट का यह सख्त कदम प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ एक बड़ा संदेश है, जो यह सुनिश्चित करता है कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों को उनके जीवन भर की कमाई और सम्मान के साथ समझौता न करना पड़े।

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