संकट में बिहार की 49.74 लाख आबादी: 15 जिलों में बाढ़ का तांडव, खतरे के ऊपर बह रहीं प्रमुख नदियां
बिहार के कई हिस्से इन दिनों गंभीर बाढ़ की चपेट में हैं, जिसका मुख्य कारण विभिन्न नदियों के जलस्तर में हुई भारी वृद्धि है। आपदा विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के 15 प्रमुख जिलों—जैसे पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, मुजफ्फरपुर, बक्सर, समस्तीपुर, खगड़िया, बेगूसराय, दरभंगा, अररिया, पूर्णिया, मधेपुरा और कटिहार—के कुल 88 प्रखंडों के अंतर्गत आने वाली 575 ग्राम पंचायतों की लगभग 49.74 लाख जनता इस विकट परिस्थिति से प्रभावित हुई है। सरकार और प्रशासन द्वारा इस आपदा से जूझ रहे लोगों तक राहत पहुँचाने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, गंडक नदी मुजफ्फरपुर के डुमरिया घाट पर, कोसी नदी खगड़िया के बलतारा और कुरसेला में, पुनपुन नदी श्रीपालपुर में, बागमती नदी बेनीबाद व सोनाखान में तथा गंगा नदी गांधीघाट, हाथीदह, भागलपुर और कहलगांव में डेंजर जोन से ऊपर बह रही है। राहत अभियानों के तहत विभिन्न क्षेत्रों में 843 सामुदायिक रसोई केंद्रों का सफल संचालन हो रहा है, जिनके माध्यम से अब तक लगभग 1.56 करोड़ लोगों के भोजन की व्यवस्था की गई है। इसके अतिरिक्त, 13 राहत शिविरों के जरिए 11,508 शरणार्थियों को आवास, भोजन और स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएँ प्रदान की जा रही हैं। प्रभावित परिवारों के बीच राहत सामग्री के रूप में अब तक लगभग 4.30 लाख पॉलीथीन शीट, 79 हजार सूखे राशन के पैकेट और 1,400 पशु पैकेट वितरित किए जा चुके हैं, तथा लोगों की आवाजाही एवं राहत कार्यों को सुचारू रखने के लिए 1,160 नावें चलाई जा रही हैं और 16,820 क्विंटल पशुचारा भी मुहैया कराया गया है। बराजों की स्थिति पर नजर डालें तो वाल्मीकिनगर में गंडक का जलस्तर 88,300 क्यूसेक, वीरपुर में कोसी का जलस्तर 1,59,170 क्यूसेक और इंद्रपुरी में सोन का जलस्तर 69,913 क्यूसेक दर्ज किया गया है, वहीं एहतियात के तौर पर एनडीआरएफ की 10 और एसडीआरएफ की 27 टीमों को विभिन्न प्रभावित जिलों में तैनात किया गया है।

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