झारखंड में पहली बार सरकारी अस्पताल में बनेगा मिल्क बैंक, रिम्स में होगी शुरुआत
रिम्स में अब नवजात शिशुओं को मां के दूध से वंचित नहीं रहना पड़ेगा। अस्पताल में जल्द ही ह्यूमन मिल्क बैंक की स्थापना की जाएगी। विश्व स्तनपान सप्ताह से पहले गुरुवार को रोटरी क्लब ऑफ रांची ने इसके लिए रिम्स प्रबंधन को प्रस्ताव सौंपा है।
रोटरी क्लब इस परियोजना के लिए रिम्स को 46.57 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देगा। प्रस्ताव के अनुसार, कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड के तहत रिम्स में कॉम्प्रिहेंसिव लैक्टेशन मैनेजमेंट सेंटर स्थापित किया जाएगा। इसके शुरू होने के बाद रिम्स झारखंड का पहला सरकारी अस्पताल बन जाएगा, जहां ह्यूमन मिल्क बैंक की सुविधा उपलब्ध होगी।
स्वास्थ्य मंत्रालय की पब्लिक हेल्थ फैसिलिटीज के लिए जारी वर्ष 2017 की लैक्टेशन मैनेजमेंट सेंटर गाइडलाइन के तहत इस केंद्र में माताओं का दूध सुरक्षित तरीके से संग्रहित किया जाएगा।
रिम्स निदेशक ने रोटरी क्लब के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए नियोनेटल विभाग को जरूरी प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है। इस सुविधा से समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चों, कम वजन वाले नवजातों और बीमार शिशुओं को विशेष लाभ मिलेगा, जिनकी माताएं किसी कारणवश पर्याप्त स्तनपान कराने में सक्षम नहीं होती हैं।
फिलहाल राज्य के सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले कई कमजोर नवजात इस जीवनरक्षक सुविधा से वंचित हैं। ह्यूमन मिल्क बैंक शुरू होने से ऐसे बच्चों को मां के दूध का विकल्प मिल सकेगा।
रिम्स निदेशक डॉ. डीके सिन्हा ने बताया कि रोटरी क्लब ऑफ रांची के प्रतिनिधिमंडल ने अस्पताल में मशीनों की स्थापना और ह्यूमन मिल्क बैंक बनाने का प्रस्ताव दिया है। इसके लिए 46.57 लाख रुपये देने की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि यह सुविधा शुरू होने के बाद रिम्स राज्य का पहला सरकारी अस्पताल होगा, जहां ह्यूमन मिल्क बैंक उपलब्ध होगा।

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