झारखंड हाई कोर्ट ने पीटीआर बाघ संरक्षण मामले में पीसीसीएफ को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का दिया निर्देश
झारखंड हाई कोर्ट ने पलामू टाइगर रिजर्व में बाघों के संरक्षण और सुरक्षा में बरती जा रही कथित लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने झारखंड के प्रधान मुख्य वन संरक्षक को मामले की अगली सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है। यह निर्देश एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया गया, जिसमें पीटीआर में बाघों की घटती संख्या और वन्यजीवों के लिए सुरक्षित वातावरण की कमी पर चिंता जताई गई थी। अदालत ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि संरक्षण के नाम पर किए जा रहे प्रयासों के जमीनी परिणाम दिखाई नहीं दे रहे हैं।
सुनवाई के दौरान, अदालत ने विशेष रूप से पीटीआर के भीतर बढ़ते मानवीय हस्तक्षेप और अवैध शिकार की संभावनाओं पर सवाल उठाए। पीसीसीएफ को अब अदालत के समक्ष यह स्पष्ट करना होगा कि बाघों के आवास को सुरक्षित करने और उनके प्रजनन के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाने के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं। इसके साथ ही, अदालत ने राज्य सरकार से पीटीआर में खाली पड़े वन रक्षकों के पदों को भरने और आधुनिक निगरानी तंत्र स्थापित करने के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इस आदेश का उद्देश्य वन्यजीव संरक्षण के प्रति प्रशासनिक जवाबदेही तय करना और पलामू टाइगर रिजर्व के पारिस्थितिक तंत्र को पुनर्जीवित करना है।

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