चालू वित्त वर्ष में भारत की विकास दर घटकर 6.7% रहने का अनुमान: रिपोर्ट
फिच ग्रुप की कंपनी BMI के अनुसार, भारत की ग्रोथ मौजूदा वित्त वर्ष में 7.7 प्रतिशत से घटकर 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है। कंपनी ने कहा कि GDP में विस्तार की गति धीमी होने और ईरान युद्ध के कारण तेल की कीमतों में आए झटके की वजह से ग्रोथ में काफी कमी आने की संभावना है।
BMI का अनुमान है कि 2026 की जनवरी-मार्च तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था में साल-दर-साल (y-o-y) आधार पर 8 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो उसके मूल अनुमान 7.8 प्रतिशत से अधिक है। कंपनी ने 2025-26 के लिए अपने ग्रोथ अनुमान को 0.1 प्रतिशत बढ़ाकर 7.7 प्रतिशत कर दिया है।
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष के बढ़ने की आशंका भारत के ग्रोथ दृष्टिकोण के लिए एक जोखिम (downside risk) पैदा करती है। ऐसे में भारत को रक्षा और ईंधन की कीमतों को स्थिर रखने पर होने वाले खर्च की जरूरतों और राजकोषीय सुदृढ़ीकरण (fiscal consolidation) के एजेंडे के बीच संतुलन बनाना होगा।
BMI ने कहा कि 2025 में GST और आयकर में किए गए कर सुधार, लागत-जनित मुद्रास्फीति (cost-push inflation) के प्रभावों को कुछ हद तक कम करेंगे। कंपनी ने आगे कहा कि मौद्रिक नीति में नरमी से पूंजीगत खर्च (capital spending) को बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि युद्ध के कारण बढ़ी अनिश्चितता और इनपुट कीमतों में वृद्धि से निवेश पर बुरा असर पड़ रहा है।
BMI ने कहा कि वित्त वर्ष 2027 के लिए ग्रोथ अनुमान में कोई बदलाव न करने के पीछे एक कारण यह है कि उसे लगता है कि पिछले साल किए गए कर सुधारों का असर 2026 की अप्रैल-जून तिमाही तक खत्म हो जाएगा। BMI ने कहा, “हम वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान 6.7 प्रतिशत GDP ग्रोथ के अपने अनुमान पर कायम हैं, क्योंकि हमारा मानना है कि नए वित्त वर्ष में इनपुट लागत बढ़ने के साथ ही पिछले साल के कर सुधारों का असर कम होता जाएगा।” कंपनी ने यह भी कहा कि GDP ग्रोथ “काफी धीमी हो सकती है।”
हालांकि, पिछली तिमाही में बिजली उत्पादन में साल-दर-साल आधार पर 2.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई, लेकिन यह वृद्धि मुख्य रूप से जनवरी-फरवरी में बिजली की मांग बढ़ने के कारण हुई थी। मार्च के महीने में बिजली की खपत में साल-दर-साल आधार पर केवल 0.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
रिपोर्ट में इस बात का भी ज़िक्र किया गया है कि ईरान में चल रहे संघर्ष के कारण आपूर्ति पहले ही बाधित हो चुकी है, और वित्त वर्ष 2027 के लिए 6.7 प्रतिशत के ग्रोथ अनुमान में इस पहलू को पहले ही शामिल कर लिया गया है। हाल ही में, संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत दुनिया में सबसे ज़्यादा रेमिटेंस पाने वाला देश बन गया है और 100 अरब डॉलर का आंकड़ा पार करने वाला एकमात्र देश है। प्रवासन पर काम करने वाली UN एजेंसी ने यह भी बताया कि 2024 में देश को रेमिटेंस के तौर पर 137 अरब डॉलर से ज़्यादा की रकम मिली।

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