हेमंत सोरेन 28 नवंबर को झारखंड के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे
हेमंत सोरेन, झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के नेता, 26 नवंबर को झारखंड के मुख्यमंत्री के रूप में चौथी बार शपथ लेने जा रहे हैं। राज्य में INDIA गठबंधन के नेता चुने गए सोरेन 24 नवंबर को शाम 4 बजे झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार से मुलाकात कर नई सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। शपथ ग्रहण समारोह रांची के मोरहाबादी मैदान में आयोजित होगा, जो राज्य में राजनीतिक कार्यक्रमों के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान है।
इस समारोह में विपक्षी INDIA गठबंधन के कई प्रमुख नेता शामिल होंगे, जिनमें कांग्रेस नेता राहुल गांधी, तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और राष्ट्रीय जनता दल के तेजस्वी यादव शामिल हैं। यह कार्यक्रम झारखंड में INDIA गठबंधन की मजबूती को दर्शाता है और हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के बाद राज्य में इसकी पकड़ को पुनः स्थापित करता है।
सोरेन की सत्ता में वापसी 2024 झारखंड विधानसभा चुनावों में JMM के नेतृत्व वाले गठबंधन की मजबूत जीत के बाद हुई है। इस गठबंधन, जिसमें JMM, कांग्रेस, RJD और CPI-ML शामिल हैं, ने 81 सदस्यीय विधानसभा में 56 सीटें जीतीं। JMM ने अकेले 34 सीटें हासिल कीं, जबकि कांग्रेस ने 16, RJD ने 4 और CPI-ML ने 2 सीटें जीतीं। इस नतीजे ने राज्य में JMM की लगातार प्रमुखता सुनिश्चित की, जिससे गठबंधन आराम से अगली सरकार बना सकता है।भारतीय जनता पार्टी (BJP) को इन चुनावों में भारी हार का सामना करना पड़ा, जिसमें वह केवल 21 सीटें ही जीत पाई। यह झारखंड के 2000 में गठन के बाद से भाजपा का सबसे खराब प्रदर्शन है। राज्य में अपनी उपस्थिति बढ़ाने और विशेष रूप से आदिवासी इलाकों में समर्थन जुटाने के प्रयासों के बावजूद, भाजपा JMM-नेतृत्व वाले गठबंधन को प्रभावी रूप से चुनौती देने में असफल रही। JMM गठबंधन ने आदिवासी-आरक्षित 28 में से 27 सीटें जीतकर अपनी मजबूत पकड़ को साबित किया, जो पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण मतदाता आधार है।
हेमंत सोरेन के नेतृत्व ने इस जनादेश को हासिल करने में अहम भूमिका निभाई है। 2024 की शुरुआत में राजनीतिक उथल-पुथल के बाद उन्होंने यह सफलता हासिल की। मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने और खनन पट्टों से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते सोरेन को प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार किया था और उन्हें कई महीने जेल में बिताने पड़े थे। झारखंड हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में वापसी की। बरहेट विधानसभा क्षेत्र से उनकी जीत, जहां उन्होंने भाजपा के गमलीएल हेम्ब्रम को 39,791 वोटों से हराया, उनकी राजनीतिक वापसी का एक महत्वपूर्ण कदम था।
JMM गठबंधन की सफलता आदिवासी क्षेत्रों में मजबूत समर्थन और आदिवासी समुदायों की जरूरतों को प्राथमिकता देने वाली नीतियों पर केंद्रित थी। गठबंधन की कल्याणकारी योजनाओं और स्थानीय शासन को बढ़ावा देने वाली नीतियों ने इसे लोकप्रिय बनाया। साथ ही, गठबंधन ने ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में महत्वपूर्ण जीत दर्ज की, जिससे यह पारंपरिक गढ़ों से बाहर अपनी पकड़ मजबूत कर सका। इस व्यापक समर्थन ने सत्ता विरोधी लहर को मात देकर गठबंधन को लगातार दूसरी बार सरकार बनाने का मौका दिया।

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