झारखंड CAG रिपोर्ट में सरकारी योजनाओं में करोड़ों की बर्बादी उजागर
झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन सोमवार को पेश सीएजी रिपोर्ट ने राज्य सरकार के कई विभागों की लापरवाही और योजनाओं में गड़बड़ियों को उजागर किया। वित्तीय वर्ष 2022-23 के अनुपालन प्रतिवेदन में कहा गया है कि करोड़ों रुपए की लागत से शुरू की गई कई योजनाओं का आम जनता को कोई लाभ नहीं मिला। पथ निर्माण विभाग ने सड़क चौड़ीकरण की योजना पर 19.15 करोड़ रुपए खर्च किए, लेकिन कार्यपालक अभियंता और भू-अर्जन पदाधिकारी के बीच समन्वय की कमी के कारण रकम बर्बाद हो गई। इसी विभाग ने दामोदर और गवई नदी पर दो पुल बनाने में 15.09 करोड़ रुपए खर्च किए, लेकिन पहुंच पथ का निर्माण न होने के कारण पुलों का कोई व्यावहारिक उपयोग नहीं हो पाया। ग्रामीण विकास विभाग के तहत बोकारो के चंदनकियारी प्रखंड में 5.09 करोड़ रुपए की लागत से मॉल जैसी इमारत बनाई गई, लेकिन अब तक इसका कोई उपयोग नहीं हो सका। विभाग ने वेब आधारित अकाउंट प्रबंधन प्रणाली पर 1.77 करोड़ रुपए खर्च किए, लेकिन यह प्रणाली अभी तक कार्यशील नहीं है। कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग ने 2014 में 16 शीतगृह और छंटाई केंद्रों पर 3.67 करोड़ रुपए खर्च किए, लेकिन एक दशक बाद भी इनमें काम शुरू नहीं हुआ।अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यक और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ने जमशेदपुर के धालभूमगढ़ में 50 बिस्तरों वाला अस्पताल 1.55 करोड़ रुपए खर्च कर बनाया, लेकिन तीन साल बाद भी यह बंद पड़ा हुआ है। सीएजी रिपोर्ट ने सरकारी योजनाओं में समन्वय की कमी, अनुपालन में चूक और धन के दुरुपयोग को गंभीर समस्या बताया। रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी अधिकारियों की लापरवाही और योजना कार्यान्वयन में गड़बड़ी के कारण जनता को योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। यह रिपोर्ट राज्य सरकार की जवाबदेही और पारदर्शिता पर भी सवाल खड़ा करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में प्रभावी निगरानी और समय पर समीक्षा न होने से करोड़ों रुपए की हानि होती है और विकास योजनाओं का उद्देश्य अधूरा रह जाता है।

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