ईरान-अमेरिका तनाव का असर कच्चे तेल में उछाल ब्रेंट क्रूड फिर 90 डॉलर के पार
ग्लोबल मार्केट में जियोपॉलिटिकल तनाव का असर एक बार फिर दिख रहा है। सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में ज़बरदस्त उछाल आया। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण निवेशकों की चिंता बढ़ गई, जिससे तेल की कीमतों में 2 प्रतिशत से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई। ब्रेंट क्रूड की कीमत एक बार फिर $90 प्रति बैरल के पार चली गई। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि वेस्ट एशिया में किसी भी तरह का मिलिट्री तनाव तेल की सप्लाई में रुकावट डाल सकता है, जिससे कीमतें बढ़ सकती हैं। अमेरिकी हमले के बाद पैदा हुई चिंताओं को तेल मार्केट में आई इस तेज़ी का मुख्य कारण माना जा रहा है; यह उछाल रविवार को अमेरिकी सेना द्वारा की गई कार्रवाई की वजह से आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में ईरान के लराक द्वीप पर मौजूद दो ईरानी लॉन्चरों को निशाना बनाया। बताया जा रहा है कि जुलाई के आखिर के बाद से खाड़ी क्षेत्र में यह अमेरिका का पहला ज्ञात हमला है। इस घटना ने मार्केट में यह डर बढ़ा दिया है कि तनाव और बढ़ने से ग्लोबल तेल सप्लाई पर असर पड़ सकता है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल ट्रांसपोर्ट रूट में से एक है; वहाँ किसी भी तरह की अस्थिरता का सीधा असर इंटरनेशनल तेल की कीमतों पर पड़ता है। ब्रेंट क्रूड $90 के पार: तेल मार्केट के डेटा के अनुसार, 22:02 GMT तक ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स में $2.22—यानी 2.52 प्रतिशत—की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे कीमत $90.32 प्रति बैरल हो गई। इस बीच, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड में भी बढ़त देखी गई, जो $2.01 (2.41 प्रतिशत) बढ़कर $85.41 प्रति बैरल पर पहुँच गया। यह तेज़ी दिखाती है कि निवेशक वेस्ट एशिया के हालात को लेकर सतर्क हो गए हैं और सप्लाई से जुड़े संभावित जोखिमों को ध्यान में रखते हुए मार्केट में प्रतिक्रिया दे रहे हैं। तेल सप्लाई को लेकर बढ़ी चिंताएँ: सप्लाई को लेकर चिंता कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का मुख्य कारण है। वेस्ट एशिया दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक क्षेत्रों में से एक है। अगर इस क्षेत्र में मिलिट्री तनाव बढ़ता है या तेल ट्रांसपोर्ट रूट में रुकावट आती है, तो ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।

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