दिव्यांग अभ्यर्थियों के हक में हाईकोर्ट का फैसला, 3 सेकंड की देरी को आधार बनाकर नियुक्ति रद्द करने पर लगाई रोक
झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने दुमका में चौकीदार नियुक्ति से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि महज तीन सेकेंड की देरी के आधार पर किसी दिव्यांग अभ्यर्थी को नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता, क्योंकि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत दिव्यांग अभ्यर्थियों को उचित सुविधा यानी ‘रीजनेबल एकोमोडेशन’ उपलब्ध कराना सरकार की वैधानिक जिम्मेदारी है।अदालत ने सुनवाई के दौरान इस बात पर विशेष रूप से गौर किया कि दुमका में दिव्यांग श्रेणी के लिए आरक्षित 13 पदों में से 11 पद अभी भी रिक्त पड़े हैं, और प्रार्थी के अधिवक्ता शुभम मिश्रा द्वारा सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए यह तर्क रखा गया था कि दिव्यांगों को उचित सुविधा से वंचित करना कानून के बिल्कुल विपरीत है।दूसरी ओर, राज्य सरकार की तरफ से यह दलील दी गई थी कि चयन नियमों में अतिरिक्त समय देने का कोई प्रावधान नहीं है, लेकिन दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने सरकार के इस तर्क को खारिज कर दिया और दिव्यांग अभ्यर्थी को नियुक्ति का पूरा हकदार मानते हुए आगामी आठ सप्ताह के भीतर अनिवार्य रूप से नियुक्ति पत्र जारी करने का कड़ा निर्देश दिया है।

देश में सबसे पहले महाकाल के आंगन में शुरू होगा दीपोत्सव
जिला प्रशासन की पहल से अनाथ बच्चे को मिला परिवार का स्नेह और संरक्षण, उपायुक्त ने दत्तक मां को सौंपा बच्चा
टाटा स्टील यूआईएसएल की ‘रिलाइफ’ पहल, अनपुयोगी घरेलू वस्तुओं को मिलेगा नया जीवन
वाराणसी में गंगा के ऊपर आसमान में वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने दिखाया करतब
दिल्ली कैपिटल्स में बड़ा बदलाव, श्रीलंका के दिग्गज चमिंडा वास बने तेज गेंदबाजी कोच
98 लाख के गबन में डीपीओ को राहत, कोर्ट से मिली एक माह की बेल