98 लाख के गबन में डीपीओ को राहत, कोर्ट से मिली एक माह की बेल
भागलपुर जिला शिक्षा विभाग में 98.12 लाख रुपये की सरकारी राशि गबन मामले में जेल में बंद डीपीओ स्थापना शशि रंजन चौधरी को निगरानी की विशेष अदालत से एक माह की प्रोविजनल बेल मिल गई है. अदालत ने मामले के जांच अधिकारी को एक माह के भीतर केस डायरी और संबंधित साक्ष्यों के साथ कोर्ट में उपस्थित होने का निर्देश दिया है. इस रिपोर्ट की समीक्षा के बाद ही उनकी नियमित जमानत पर निर्णय लिया जाएगा. जांच के दौरान शिक्षा विभाग में फर्जी शिक्षिका के बैंक खाते में वेतन मद से भारी राशि अंतरित करने का बड़ा खुलासा हुआ था. जुलाई और अगस्त 2026 के दौरान ही फर्जी शिक्षिका के खाते में 90 लाख रुपये से अधिक का भुगतान किया गया था. पूर्व के भुगतानों को मिलाकर कुल गबन राशि 98,12,773 रुपये तक पहुंच गई थी. क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक सुभाष कुमार गुप्ता के आवेदन पर जोगसर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी. इसमें डीपीओ शशि रंजन चौधरी, जिला शिक्षा पदाधिकारी चंदन कुमार, लिपिक शिशिर कुमार झा और सेवामुक्त ऑपरेटर अविनाश राज सहित कुल छह लोगों को नामजद अभियुक्त बनाया गया था. प्राथमिकी में अविनाश राज की पत्नी काजल और तनुजा देवी के नाम भी दर्ज हैं. जांच में सामने आया कि सेवामुक्त ऑपरेटर अविनाश राज ने विभागीय कर्मियों की लॉगिन आईडी का दुरुपयोग कर फर्जी शिक्षिका का नाम पे-रोल में जोड़ा था. साथ ही एचआरए और सीटीए की राशि में भी हेरफेर किया गया था. मामले में लापरवाही और संलिप्तता के आरोप में डीपीओ और ऑपरेटर को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था, जहां से अब डीपीओ को सशर्त राहत मिली है.

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