झारखंड में ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ पर सामूहिक गायन
भारत के राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ की रचना के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में प्रदेश भाजपा ने शुक्रवार को राज्यभर में जगह-जगह सामूहिक गान कार्यक्रम आयोजित किया। मुख्य कार्यक्रम पार्टी मुख्यालय रांची में हुआ, जबकि धनबाद, देवघर और दुमका सहित विभिन्न जिलों में भी कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों ने एक स्वर में ‘वंदे मातरम’ गाकर राष्ट्रगीत के गौरवशाली इतिहास को नमन किया। प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने 1875 में जब ‘वंदे मातरम’ लिखा, तब उन्होंने भारत माता को त्रिदेवियों—दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती—के रूप में देखा। उन्होंने कहा, “अन्याय और अत्याचार के खिलाफ लड़ती भारत माता दुर्गा हैं, समृद्धि लक्ष्मी हैं और ज्ञान-विज्ञान की ज्योति सरस्वती हैं।” प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष एवं सांसद आदित्य साहू ने कहा कि प्राचीन भारत वह भूमि है जिसने धरती को केवल मिट्टी नहीं, बल्कि मातृभूमि के रूप में पूजनीय माना। इसी भाव से ‘वंदे मातरम’ के स्वर फूटे, जो आज भी देश की आत्मा में गूंजते हैं। प्रदेश संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह ने कहा कि ‘वंदे मातरम’ कोई गीत नहीं, बल्कि भारत माता की आराधना का जागृत मंत्र है। उन्होंने कहा कि इसी मंत्र से विकसित, आत्मनिर्भर और स्वाभिमानी भारत का स्वप्न साकार होगा।

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