डेटा प्राइवेसी अब केवल नियम नहीं, बल्कि भरोसे का मामला: एयोन विशेषज्ञ
एयोन के एक वरिष्ठ कार्यकारी के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव के साथ डेटा प्राइवेसी और साइबर सुरक्षा से जुड़े जोखिम तेजी से बढ़ रहे हैं। एयोन इंडिया की साइबर लीडर और उपाध्यक्ष अपूर्वा गोपीनाथ ने बताया कि डेटा चोरी (डेटा ब्रीच) की लागत और प्रभाव चिंताजनक स्तर पर पहुँच गए हैं। वर्ष दो हज़ार पच्चीस में डेटा चोरी की वैश्विक औसत लागत चार दशमलव चार मिलियन से चार दशमलव नौ मिलियन अमेरिकी डॉलर के बीच अनुमानित की गई थी, जबकि वैश्विक साइबर अपराध से होने वाला नुकसान सालाना ट्रिलियन डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है।
एयोन के ग्लोबल रिस्क मैनेजमेंट सर्वे के अनुसार, भारतीय व्यवसायों के लिए ‘साइबर हमले और डेटा चोरी’ सबसे बड़ा जोखिम बना हुआ है। साथ ही, डेटा प्राइवेसी नियमों का पालन न करना भी एक बड़ी चिंता के रूप में उभरा है, क्योंकि भारत में काम करने वाली कंपनियों पर स्थानीय और वैश्विक विनियामक ढाँचों का प्रभाव बढ़ रहा है। सुश्री गोपीनाथ ने इस बात पर जोर दिया कि संगठनों को डेटा संग्रह सीमित करना चाहिए, अपने पास मौजूद डेटा की सुरक्षा करनी चाहिए और सेवाओं के वितरण में एआई के उपयोग को लेकर पारदर्शी होना चाहिए ताकि ग्राहकों का भरोसा बना रहे।

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