रांची के भगवान महावीर मणिपाल अस्पताल में टोटल आर्टेरियल सीएबीजी सर्जरी से युवा हृदय रोगियों के लिए नई उम्मीद जगी है
झारखंड में कार्डियक सर्जरी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए, भगवान महावीर मणिपाल हॉस्पिटल्स, रांची ने सफलतापूर्वक टोटल आर्टेरियल कोरोनरी आर्टरी बायपास ग्राफ्टिंग (CABG) सर्जरी की है। यह उपलब्धि क्षेत्र में उन्नत और लंबे समय तक प्रभावी हृदय उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह जटिल सर्जरी डॉ. अरुमित पालित, कंसल्टेंट – कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी, द्वारा 48 वर्षीय पुरुष मरीज पर की गई, जिन्हें गंभीर हार्ट अटैक हुआ था। मरीज को पहले बोकारो के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहाँ आपातकालीन एंजियोग्राफी और बैलून इंटरवेंशन किया गया। कम उम्र में ही हृदय की धमनियों में गंभीर ब्लॉकेज पाए जाने के कारण उन्हें आगे के इलाज के लिए रांची रेफर किया गया।
रांची पहुंचने पर मरीज के हृदय की कार्यक्षमता काफी कम हो चुकी थी और हार्ट की पंपिंग क्षमता घटकर 35–40 प्रतिशत रह गई थी। कुछ दिनों तक निगरानी और स्थिरीकरण के बाद डॉक्टरों ने उन्नत ऑफ-पंप टोटल आर्टेरियल सीएबीजी (CABG) सर्जरी की, जिसमें पारंपरिक नसों के बजाय धमनियों का उपयोग करते हुए चार बायपास ग्राफ्ट लगाए गए। सर्जरी के बारे में बताते हुए डॉ. अरुमित पालित ने कहा, “टोटल आर्टेरियल बाईपास सर्जरी युवा मरीजों के लिए लंबे समय तक बेहतर परिणाम देता है। धमनियों से किए गए ग्राफ्ट अधिक समय तक कार्यशील रहते हैं, उनमें दोबारा ब्लॉकेज होने की संभावना कम होती है और रक्त प्रवाह बेहतर बना रहता है। इससे मरीजों को कई वर्षों तक दोबारा बायपास सर्जरी की आवश्यकता से बचाया जा सकता है। तीव्र हार्ट अटैक से उबर रहे मरीज में इस तरह की सर्जरी का सफल होना यहाँ उपलब्ध उन्नत सर्जिकल क्षमता और समग्र हृदय देखभाल को दर्शाता है।”
इस सर्जरी में मरीज की छाती और हाथ की धमनियों का उपयोग कर बायपास किया गया। हार्ट अटैक के तुरंत बाद सर्जरी करना जोखिमपूर्ण होने के बावजूद, पूरी प्रक्रिया ऑफ-पंप तकनीक से की गई, जिसमें हार्ट-लंग मशीन या अन्य यांत्रिक सहायता की आवश्यकता नहीं पड़ी। इससे मरीज की रिकवरी अधिक सुरक्षित और तेज रही। सर्जरी के बाद मरीज की हालत तेजी से सुधरी और उन्हें पांचवें दिन अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। वह स्वयं चलने-फिरने में सक्षम थे। फॉलो-अप जांच में हृदय की पंपिंग क्षमता बढ़कर लगभग 60 प्रतिशत पाई गई, जो सामान्य स्तर के करीब मानी जाती है।

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