कल्याण बनर्जी की लोकसभा में मनरेगा फंड को लेकर केंद्रीय मंत्री से नोंकझोंक
मंगलवार को तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के बीच बंगाल को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत मिलने वाले फंड को लेकर बहस गई.सिंह की कथित टिप्पणी के जवाब में बनर्जी ने कहा कि आपको मंत्री किसने बनाया है? जिसके बाद सदन में हंगामा मच गया। मंत्री को फटकार लगाते हुए कल्याण बनर्जी ने कहा कि यह स्वीकार्य नहीं है। आप एक केंद्रीय मंत्री हैं और आप इस तरह का व्यवहार कर रहे हैं! वह इस कमेंट को क्यों पास करेंगे? हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि सिंह ने ऐसा क्या कहा था, जिससे यह बहस हुई। मनरेगा फंड रोके जाने के मुद्दे पर बनर्जी ने केंद्र सरकार पर बंगाल को उसके उचित आवंटन से वंचित करने का आरोप लगाया था।
उन्होंने कहा कि पिछले तीन सालों से हम इस मुद्दे को उठा रहे हैं। केंद्र का दावा है कि 25 लाख रुपये की धोखाधड़ी हुई है और हमने लगातार उनसे कार्रवाई करने का आग्रह किया है, लेकिन यह राज्य के 10 करोड़ लोगों को लाभ से वंचित करने का कारण नहीं हो सकता। इससे पहले बनर्जी ने गिरिराज सिंह की कथित टिप्पणी पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए सवाल किया कि आपको मंत्री किसने बनाया? इस टिप्पणी पर सत्ता पक्ष की ओर से कड़ी आपत्ति जताई गई, जिससे सदन में व्यवधान उत्पन्न हो गया।
केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बनर्जी की टिप्पणी पर आपत्ति जताते हुए कहा कि प्रश्नकाल के दौरान सदस्यों को सवाल पूछने चाहिए, व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। वह कौन होते हैं किसी की मंत्री पद पर नियुक्ति पर सवाल उठाने वाले? हंगामे के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने हस्तक्षेप करते हुए सदस्यों से शिष्टाचार बनाए रखने का आग्रह किया। बिरला ने कहा कि व्यक्तिगत टिप्पणियों से बचना चाहिए। बोलते समय अपने शब्दों का चयन सावधानी से करें। किसी को भी अनौपचारिक टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया नहीं देनी चाहिए। हालांकि, उनकी अपील पर विपक्षी बेंचों की ओर से असंतोष व्यक्त किया गया। इस बीच मनरेगा फंड पर बनर्जी के सवाल का जवाब देते हुए केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान ने बंगाल में योजना के क्रियान्वयन में अनियमितताओं के आरोपों को दोहराया।
पासवान ने कहा कि इस सदन में एक ही सांसद द्वारा फंड में बाधा का मुद्दा बार-बार उठाया जाता है। केंद्र की टीम ने पाया कि केंद्रीय योजनाओं का नाम बदला जा रहा है। टेंडर को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटा जा रहा है और हमारे अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा है। भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि मनरेगा फंड का मुद्दा केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच एक बड़ा विवाद रहा है, जिसमें राज्य बार-बार वित्तीय भेदभाव का आरोप लगाता है जबकि केंद्र प्रक्रियागत उल्लंघन का हवाला देता है।

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