झारखंड राज्य महिला आयोग पिछले ५ वर्षों से निष्क्रिय ४,००० मामले लंबित
झारखंड राज्य महिला आयोग ७ जून, २०२० से बिना किसी अध्यक्ष या सदस्यों के निष्क्रिय पड़ा है, जिसके कारण महिलाओं को न्याय मिलने में भारी देरी हो रही है। दिसंबर २०२५ तक के आंकड़ों के अनुसार, आयोग के पास लगभग ३,९८२ शिकायतें लंबित हैं, जिनमें घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न और यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर मामले शामिल हैं। स्थिति इतनी चिंताजनक है कि हर दिन २ से ३ नई शिकायतें दर्ज की जा रही हैं, लेकिन आयोग के पास सुनवाई करने या फैसला सुनाने की कोई शक्ति नहीं है, जिससे पीड़ित महिलाएं सालों से दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की २०२३ की रिपोर्ट झारखंड में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों की एक भयावह तस्वीर पेश करती है, जहाँ राज्य दहेज उत्पीड़न के मामलों में देश में शीर्ष पर है। राष्ट्रीय महिला आयोग और उच्च न्यायालय ने भी इस मुद्दे पर कड़ी आपत्ति जताई है और राज्य सरकार को आयोग के पुनर्गठन में हो रही देरी पर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है। सरकार का तर्क है कि गठबंधन की राजनीति और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण नियुक्तियों में समय लग रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इस संस्थागत विफलता से राज्य की हजारों महिलाओं के संवैधानिक और कानूनी अधिकारों का हनन हो रहा है।

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