भारतीय कॉरपोरेट जगत में डिजिटल क्रांति एआई, क्लाउड और कनेक्टेड प्लेटफॉर्म्स से भारत में कंप्लायंस का नया दौर शुरू
हर कुछ वर्षों में भारत का कंप्लायंस सिस्टम एक बहुत बड़े बदलाव से गुजरता है। देश के भीतर गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स यानी जीएसटी की शुरुआत, डिजिटल पेमेंट्स का लगातार बढ़ता इस्तेमाल, ई-इनवॉयसिंग और रियल-टाइम रिपोर्टिंग की लगातार बढ़ती जरूरतों ने समय-समय पर देश के पूरे कारोबार और प्रोफेशनल्स के काम करने के बुनियादी तरीके को पूरी तरह से बदल दिया है। अब भारतीय बाजार में एक और बहुत बड़ा बदलाव सामने आ रहा है, जहाँ कंप्लायंस सिर्फ पारंपरिक लेनदेन तक सीमित एक प्रक्रिया न रहकर किसी भी कारोबार का एक स्मार्ट और आपस में गहराई से जुड़ा हुआ मुख्य हिस्सा बनता जा रहा है।
इस व्यवस्था के व्यावहारिक और संगठनात्मक लाभों पर बात करते हुए रिपोर्ट में बताया गया है कि कई वर्षों तक कंप्लायंस को कंपनियों के भीतर बैंक-ऑफिस से जुड़ा एक ऐसा काम माना जाता रहा, जो बेहद जटिल, अत्यधिक समय लेने वाला और अलग-अलग सिस्टम्स, टीमों तथा बिखरी हुई प्रक्रियाओं में बंटा होता था। लेकिन अब डिजिटल हो रही अर्थव्यवस्था और बदलते वैश्विक परिदृश्य में तेजी से हालात बदल रहे हैं। तेजी से डिजिटल हो रही वर्तमान अर्थव्यवस्था में, जहाँ सरकारी नियम लगातार बदल रहे हैं और कंपनियों को तुरंत वित्तीय फैसले लेने पड़ते हैं, वहाँ कंप्लायंस अब कारोबार की वास्तविक स्थिति समझने, काम को बेहतर और पारदर्शी बनाने, रणनीतिक जोखिम कम करने और सही फैसले लेने में भी एक बेहद अहम भूमिका निभा रहा है।

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