झारखंड को 11 पारंपरिक उत्पादों के लिए GI टैग मिला
झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को तब और बढ़ावा मिला जब राज्य के 11 पारंपरिक उत्पादों को ‘जियोग्राफिकल इंडिकेशन’ (GI) टैग दिया गया।
इन नए मान्यता प्राप्त उत्पादों में भोया साड़ी और फैब्रिक, कुचाई सिल्क साड़ी, केसरिया कलाकंद, डोकरा क्राफ्ट, तुमका चादर, बारोनी पेंटिंग, मुंडा ज्वेलरी, झारखंड बैम्बू क्राफ्ट, टसर सिल्क और साड़ियां, जादुपटिया पेंटिंग और पंचो साड़ी और फैब्रिक शामिल हैं।
जानकारों का कहना है कि GI मान्यता से पारंपरिक कला और शिल्प को संरक्षित करने में मदद मिलेगी, साथ ही कारीगरों और बुनकरों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक बेहतर पहुंच मिलेगी। इससे पहले सोहराई पेंटिंग को भी GI टैग मिल चुका है, जबकि राज्य के कई अन्य उत्पाद अंतिम पंजीकरण का इंतजार कर रहे हैं।

झारखंड के पारंपरिक हुनर को मिली वैश्विक पहचान भगैया सिल्क, कुचाई सिल्क, मुंडा आभूषण और बांस शिल्प को मिला जीआई टैग
पंद्रहवीं झारखंड स्टेट सीनियर स्विमिंग चैंपियनशिप का समापन: मेजबान पूर्वी सिंहभूम ने पुरुष और महिला दोनों वर्गों में जीता खिताब
झारखंड के दुमका जिले में अवैध व्यापार से बचाई गई मादा भालू, तस्करों की प्रताड़ना के बाद इलाज के लिए भेजी गई रेस्क्यू सेंटर
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन का झारखंड दौरा कार्यकर्ताओं को दिया दो हजार उनतीस के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटने का मंत्र
महेंद्र सिंह धोनी बने बिहार-झारखंड के सबसे बड़े व्यक्तिगत करदाता, आयकर विभाग ने जुटाए बीस हजार करोड़ रुपये
राज्यसभा चुनाव झारखंड में कांग्रेस और झामुमो द्वारा अनदेखी से राजद और भाकपा नाराज